Sunday, October 6, 2019

गैर मुस्लिम काफिरों पर जिहाद की नीति

लेख में दिए गए तथ्य डा. सुब्रमणियन स्वामि (तत्काल राज्य सभा सांसद, पूर्व हार्वर्ड प्रोफेसर, पूर्व सदस्य- भारतीय प्लानिंग कमिशन, पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर), डेविड वुड्स (अमेरिकन एक्टिविस्ट, रिलिजन रिसर्चर), मोसेब युसुफ़ (भूतपूर्व मुस्लिम, इस्लामिक स्कॉलर, पुत्र: हमास लीडर- इस्लामिक आतंकवादी संगठन) की स्पीच एवं लेख में से लिए गए हैं।

गैर मुस्लिम काफिरों पर जिहाद की नीति
3 Stages of Armed Jihad

जिहाद ए असगर - गैर मुस्लिम काफिरों पर जिहाद

इस्लाम समूचे संसार को 3 भागों में विभाजित करता है। इन तीनों भागों में इस्लाम की नीति मुसलमान काफिरों के लिए स्पष्ट है:
दारुल अमन: जब मुस्लिम आबादी अल्पसंख्यक हो और बहुमत गैर मुस्लिम काफिर आबादी एकजुट हो।
दारुल हरब: जब मुस्लिम आबादी अल्पसंख्यक हो औेर बहुसंख्यक गैर मुस्लिम आबादी एकजुट ना हो।
दारुल इस्लाम: जब मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक हो।

1. दारुल अमन: जब मुस्लिम आबादी अल्पसंख्यक हो और बहुमत गैर मुस्लिम काफ़िर आबादी एकजुट हो (छिपा हुआ जिहाद): यहां इस्लाम निर्देशित करता है कि ऊपर से गैर मुसलमान काफिरों के मित्र बन जाओ परन्तु अंदर से उन्हें सदैव अपना शत्रु मानो। सदैव एकजुट रहो, अपनी जनसंख्या की वृद्धि करते रहो। दारुल अमन में मुसलमान शांति पूर्ण तरीके से जिहाद करते हैं। इसको छिपा हुआ जिहाद भी कहा जा सकता है। “दारुल अमन में संसार के सारे अच्छे मुस्लिम मिलते हैं जो सबके साथ मिल जुल के रहते प्रतीत होते हैं।”
उदाहरण ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया में एक बार एक इस्लामिक विद्वान ने मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करते हुए वहां की सरकार से यह मांग रखी कि हम मुसलमान हैं और हमारे विवाह एवं तलाक आदि के नियम शरीयत के अनुसार होते हैं अथवा अलग हैं। इसलिए मुस्लिमों के लिए उनके धर्म के नियमों के अनुसार विवाह, तलाक आदि की व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए। उस समय ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री एक महिला थी। प्रधान मंत्री ने कहा कि जिनको शरिया चाहिए वे अपना सामान बांधें और उस देश में जाकर रहें जहां शरिया कानून लागू है। ऑस्ट्रेलिया में Uniform Civil Code सबके लिए एक समान कानून  विधान ही रहेगा। अगले दिन सब मुसलमानों ने एकजुट होकर कहा कि वह मौलाना तो पागल है, हम सब ऑस्ट्रेलियन कानून से अत्यंत प्रसन्न हैं। जो मुसलमानों को ऑस्ट्रेलिया में स्वीकृत हैं वह भारत में कदापि मान्य नहीं है।

2.  दारुल हरब: जब मुस्लिम आबादी अल्पसंख्यक हो औेर बहुसंख्यक गैर मुस्लिम आबादी एकजुट ना हो (रक्षात्मक जिहाद): यहां इस्लाम कहता है कि जो भी इस्लाम के  खिलाफ बोले या उसके खिलाफ आवाज़ उठाए उसे मृत्यु दे दो। अपने इस्लामिक अधिकारों  के लिए, शरिया कानून के लिए मांग करते रहो। संगठित रहो एवं अपनी जनसंख्या की वृद्धि करते रहो। “दारुल हरब में अच्छे (सामान्य जिहादी) एवं बुरे (कट्टरपंथी जिहादी) मुसलमान दोनों मिलेंगे। हरी टिड्डी रूपी बुरे मुसलमान हरी घास रूपी अच्छे मुसलमानों में छुप कर जिहाद करते हैं। बहुसंख्यक गैर मुस्लिम काफिरों को भ्रमित रखने  के लिए मुस्लिमों कि छवि बनाने का कार्य घास रूपी अच्छे मुसलमान करते हैैं।”  घास रूपी अच्छे मुस्लिम इस बात का प्रचार करते हैं कि सब मुसलमान बुरे नहीं होते। इसमें मुस्लिमों के द्वारा किए गए एक दो छोटे बड़े कार्यों को बड़ा चड़ा के बड़े स्तर पर प्रचारित किया जाता है। इसमें तथाकथित अच्छे मुस्लिम जो सिनेमा से जुड़े हैं वे  सिनेमा के माध्यम से, जो लेखक हैं वे लेख  के माध्यम से, जो समाचार से जुड़े हो वे समाचार के माध्यम से, जो जिस क्षेत्र  संबंधित होता है वो उस क्षेत्र के माध्यम से मुसलमानों की छवि को सुधारने  कार्य करते हैं। वे ऐसा करने में यह भी प्रस्तुत करने का भी प्रयत्न करते हैं कि मुसलमानों  साथ कितना अत्याचार हो रहा है।  इस प्रकार तथाकथित अच्छे मुसलमान जिहाद में अपना सहयोग प्रदान करते हैं।
इस प्रकार के जिहाद के अनेक उदाहरण हैं जैसे भारत, फ्रांस, इंग्लैंड, अधिकांश यूरोप, अमेरिका आदि। उदाहरण के लिए फ्रांस में एक समाचार पत्रिका ने 53 वर्ष के पैगम्बर मोहम्मद का चित्र उसकी 7 वर्ष की आयु की बेगम के साथ प्रसारित किया जो की सच है। ऐसा करने पर जिहादियों ने उनके कार्यालय में घुस कर 17 लोगों को मार डाला और 19 लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। पर जब एम. एफ. हुसैन नामक पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण पेंटर  ने हिन्दू देवी देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर प्रसारित किए तो सब तथाकथित अच्छे मुसलमान चुप रहकर जिहाद में योगदान कर रहे थे। तथाकथित अच्छे मुसलमान गाज़ा में मुसलमानों के इस्राएल के द्वारा मारे जाने पर समूचे विश्व में प्रदर्शन करते हैं परन्तु इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा दसियों हज़ार यज़िडी yazidi  लड़कियों एवं स्त्रीयों को सेक्स गुलाम बनाने पर एकदम चुप रहकर काफिरों पे जिहाद का समर्थन करते हैं। 6 से 7 साल की बच्चियों का भी दिन में 30 से ज़्यादा बार बलात्कार किया जाता रहा। सिर्फ यही नहीं इन सेक्स ग़ुलामों का बाज़ार लगाकर $10 से $500 में बेच दिया जाता। अच्छे मुसलमान इसलिए भी चुप रहते हैं क्योंकि इस्लाम  अनुसार काफ़िर महिलाओं को सेक्स ग़ुलाम बना कर रखना हलाल (पुण्य) का  कार्य है और प्रत्येक काफ़िर सेक्स ग़ुलाम के बदले जन्नत में एक हूर (सुंदर कुंवारी कन्या जो सेक्स करने के बाद भी कुंवारी रहती है) अधिक प्राप्त होती है। प्रोफेट मोहम्मद की भी अनेक काफ़िर सेक्स गुलाम थी। मोहम्मद घोरी, गज़नी, बाबर, अक़बर, जहांगीर, औरगज़ेब आदि इस्लामिक आक्रांताओं की अनगिनत काफ़िर सेक्स गुलाम थी। काफ़िर सेक्स गुलाम से पैदा होने वाली संतान इस्लाम के अनुसार जिहादी होती है। विश्व की ज़्यादातर मुस्लिम आबादी इसी प्रकार के जिहाद के फलस्वरूप विकसित हुई है।

3. दारुल इस्लाम: जब मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक हो (आक्रामक जिहाद): यहां पर इस्लाम कहता है कि गैर मुस्लिम काफिरों को जहां भी देखो मार दो, जो कुछ भी उनका हो उसपर अतिक्रमण लो। उनकी स्त्रीयों को ग़ुलाम बना लो। उनके साथ तब तक बलात्कार करो जब तक वे इस्लाम ना कबूलें। ऐसा करना हलाल (पुण्य) है और जो भी इसे हराम (पाप) कहेगा उस पापी को मार देना अनिवार्य है। इस्लाम यह स्पष्ट बताता है कि एक मुसलमान के लिए किन औरतों  साथ  शारीरिक संबंध बनाना हलाल (पुण्य) है। उसमें कहा गया है कि अपनी बेगमों (wives) और काफ़िर ग़ुलाम स्त्रियों के साथ शारीरिक संबंध बनाना हलाल (पुण्य) है। उन गुलाम औरतों से पैदा होने वाले बच्चे नए जिहादी होते हैं। “दारुल इस्लाम में केवल कट्टरपंथी मुसलमान  ही दिखाई पड़ते हैं, सामान्य अच्छे मुसलमान अचानक से कहीं लुप्त हो जाते हैं।” दारुल इस्लाम के अनेक उदाहरण हैं। निकटतम उदाहरण इराक़ में yazidi यज़िडी धर्म के लोगों के साथ हुआ नरसंहार एवं यज़िडी स्त्रियों को सेक्स स्लेव बनाकर उनके अमानवीय बलात्कार। 1990 कश्मीर में बहुसंख्यक मुसलमानों ने मस्जिदों से नारे लगा कर घोषणा की थी कि कश्मीर में रहना होगा तो अल्लाह हु अक़बर कहना होगा। उन्होंने अल्पसंख्यक हिन्दुओं को तीन विकल्प दिए थे। 1. मुसलमान बन जाओ 2. मारे जाओ 3. अपनी स्त्रियों को छोड़ के यहां से चले जाओ। जब बात स्त्रियों पर  आयी तो कश्मीरी हिन्दुओं ने लाखों की संख्या में पलायन शुरू कर दिया। उसमें भी पुरूषों को मार दिया गया छोटी बच्चियों, लड़कियों और औरतों का सामूहिक बलात्कार करके हज़ारों हिन्दू स्त्रियों को सड़कों  पर नग्न घुमाया गया। मुसलमान छात्रों ने अपनी हिन्दू अध्यापिकाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किए, हिन्दू साइंटिस्ट, मीडिया कर्मी, पुलिस कर्मी, इंजिनियर, डॉक्टर, नर्स किसी पर कोई दया नहीं की गई। लाखों हिंदुओं का नर-संहार किया गया, लाखों हिन्दू बच्चियां, लड़कियाँ, महिलाएं आज भी लापता हैं। वे जीवित हैं या नहीं कोई नहीं जानता। कुछ के घरवाले आज भी उम्मीद लगाकर बैठे हैं। लगभग 100% कश्मीरी मुसलमानों की जनसंख्या ने काफ़िर हिंदुओं पर जिहाद में सहयोग किया था। तो क्या उन सबको अपराधी मानना तर्कसंगत नहीं है। 5,00,000 से ज़्यादा कश्मीरी हिन्दू आज भी अपने ही देश में शरणार्थी हैं जिनकी सुनने वाला कोई नहीं।
अभी  2017 में मयानमार में हिन्दू पुरुषों की सामूहिक कब्रें मिली। यह कब्रें तब मिली जब कुछ हिन्दू लड़कियों को रोहिंग्या मुसलमानों के कैम्प से सुरक्षाबलों द्वारा  छुड़ाया गया। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनके गांव पर मुसलमानों ने सामूहिक हमला किया। हिंदुओं को चुन चुन के निकाला गया। उनकी आंखों के सामने उनके परिवार के पुरुषों कि अत्यंत अमानवीय तरीके से हत्या कि गई। हिंदु औरतों को सेक्स गुलाम बनाकर उनके साथ लगातार दिन रात बलात्कार किए गए। उनमें से कुछ ने बच्चों को जन्म दिया और कुछ दोबारा गर्भवती थीं। जो ज़्यादा हतभागी थीं वे अब भी लापता हैं।
इसके अलावा दारुल इस्लाम के और बहुत से उदाहरण हैं जहां पिछले 1400 सालों में कश्मीर जैसा जिहाद हुआ। मुसलमानों के 50 से ज़्यादा देश हैं। जितने भी देश हैं वे सब पहले हिन्दू, पर्सियन, क्रिश्चियन, यहूदी एवं बुद्धिस्ट देश थे जो के जिहाद के शिकार हुए। पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश में हिन्दू और सिखों को अत्यंत प्रताड़ित किया जाता है। 14 साल का होते ही हिन्दू एवं सिख लड़कियों को उठा लिया जाता है। पुलिस में जाने पर जवाब मिलता है कि तुम्हारी लड़की ने कलमा पड़ लिया है और वह मुसलमान हो गई है, वह अपने शौहर(पति) के घर है। अब तुम्हारा उससे कोई वास्ता नहीं। उसे भूल जाओ। उनकी रिपोर्ट भी नहीं लिखी जाती। ननकाना साहिब पाकिस्तान में जब एक भारतीय न्यूज़ चैनल ने इसका सबूतों  साथ प्रसारण किया तो उसके रिपोर्टर पर एयरपोर्ट  पास ही आतंकी हमला हुआ जिसमें वह किसी तरह जीवित बच गया।  देश तो दूर की बात है, जिस गांव, छोटी कॉलोनी, शहर अथवा राज्य में भी मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक होती है तो वहां भी गैर मुसलमानों के साथ जिहाद की वारदातें एवं यातनाएं बड़े स्तर पर होना सामान्य है। उदाहरस्वरूप केरल- मल्लापुरम, पश्चिम बंगाल- आसनसोल, रानीगंज, उत्तर प्रदेश- कैराना, मऊ आदि।

ऊपर बताए गए तथ्य भारतीय राज्य सभा सांसद डा. सुब्रमणियन स्वामी ने अमेरिका में अपनी स्पीच में उजागर किए हैं। डेविड वुड्स (अमेरिकन एक्टिविस्ट) ने उस स्पीच की व्याख्या कर उसे और विस्तार  इसे समझाया है।

इस्लाम के अनुसार काफिर कौन है
जो सर्वशक्तिमान अल्लाह में विश्वास ना रखें। या
जो प्रॉफिट मुहम्मद को आखिरी पैगम्बर (मैसेंजर) ना माने अथवा उसमें श्रद्धा ना रखे। या
जो मूर्ति पूजा करते हों। या
इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले लोग। या
जिसकी इस्लाम में तो श्रद्धा हो लेकिन इस्लाम के साथ दूसरे धर्म में भी विश्वास हो अथवा उसके प्रति सम्मान हो।
ऊपर वर्णित पांचों में से कोई व्यक्ति किसी एक मापदंड को भी पूर्ण करले तो वह काफ़िर है।

गैर मुसलमानों के साथ अल - तक्किया की नीति

अल ताक्किया नीति  अनुसार एक मुसलमान के लिए काफिरों के साथ झूठी कसम खाना, झूठ बोलना, धोखा देना, झूठे राजनीतिक  रक्षा समझौते करना हलाल पुण्य है।

जिहाद ए अक़बर (मुसलमान का मुसलमानों के प्रति जिहाद) एवं जिहाद ए असगर (मुसलमानों का काफिरों के प्रति किया जाने वाला जिहाद) में अन्तर

जब भी कभी काफिरों पर जिहाद की असलियत खुलने लगती तो इस्लामिक तथाकथित विद्वान्  एक स्वर में कहने लगते हैं कि यह जिहाद नहीं है, किसी प्यासे को पानी पिलाना जिहाद है, किसी की सहायता करना जिहाद है।  दूसरा तर्क इस्लामिक तथाकथित विद्वान् देते हैं कि इस्लाम कहता है कि एक बेगुनाह को मारने का मतलब है पूरी इंसानियत को मारना।
यह तर्क सुनके लोग भ्रमित हो जाते हैं कि यह जिहाद है जो यह तथाकथित विद्वान कह रहा है या वो जिहाद है ऊपर बताया गया है।
इस्लाम में सबसे बड़ा गुनाह है कुफ्र या काफ़िर होना। काफिरों  पर दया करना हराम (पाप) है। काफिरों  लिए तभी कुछ किया जा सकता है अगर वह इस्लाम को सशक्त करने  लिए हो अथवा नहीं। पानी पिलाना आदि अच्छे कार्य करना, यह केवल मुसलमानों का  मुसलमानों  प्रति जिहाद ए अक़बर का हिस्सा है। एक निर्दोष को मारना पूरी इंसानियत  मारने के बराबर है यह भी जिहाद ए अक़बर का हिस्सा है क्योंकि गैर मुस्लिम काफ़िर होना इस्लाम के हिसाब से सबसे बड़ा अपराध है और उनको मारना हलाल (पुण्य) है।

समूचे विश्व में गैर मुस्लिम काफिरों पर जिहाद करने वाले कुछ जिहादी आतंकवादी संगठनों की सूची। इन संगठनों को अपना आदर्श मानने वालों की संख्या करोड़ों में है:

1. अल-शबाब (अफ्रीका),
2. अल मुरबितुन (अफ्रीका),
3. अल-कायदा (अफगानिस्तान),
4. अल-कायदा (इस्लामिक मगरेब),
5. अल-कायदा (भारतीय उपमहाद्वीप),
6. अल-कायदा (अरब प्रायद्वीप),
7. हमास (फिलिस्तीन),
8. फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (फिलिस्तीन),
9. (फलस्तीन) मुक्ति के लिए लोकप्रिय मोर्चा,
10. हिज़बुल्लाह (लेबनान),
11. अंसार अल-शरिया-बेनगाज़ी (लेबनान),
12. असबत अल-अंसार (लेबनान),
13. ISIS (इराक),
14. ISIS (सीरिया),
15. ISIS (कॉकस)
16. ISIS (लीबिया)
17. ISIS (यमन)
18. ISIS (अल्जीरिया),
19. आईएसआईएस (फिलीपींस)
20. जुंद अल-शाम (अफगानिस्तान),
21. अल-मौराबितौन (लेबनान),
22. अब्दुल्ला आज़म ब्रिगेड (लेबनान),
23. अल-इतिहाद अल-इस्लामिया (सोमालिया),
24. अल-हरमीन फाउंडेशन (सऊदी अरब),
25. अंसार-अल-शरिया (मोरक्को),
26. मोरक्कन मुद जादीन (मोरक्को),
27. सलाफिया जिहादिया (मोरक्को),
28. बोको हरम (अफ्रिका),
29. (उज्बेकिस्तान) का इस्लामी आंदोलन,
30. इस्लामिक जिहाद यूनियन (उज्बेकिस्तान),
31. इस्लामिक जिहाद यूनियन (जर्मनी),
32. DRW ट्रू-रिलिजन (जर्मनी)
33. फजर नुसंतरा आंदोलन (जर्मनी)
34. DIK हिल्डशाइम (जर्मनी)
35. जैश-ए-मोहम्मद (कश्मीर),
36. जैश अल-मुहाजरीन वाल-अंसार (सीरिया),
37. फिलिस्तीन (सीरिया) की मुक्ति के लिए लोकप्रिय मोर्चा,
38. जमात अल दावा अल कुरान (अफगानिस्तान),
39. जुंडल्लाह (ईरान)
40. Quds Force (ईरान)
41. कटैब हिज्बुल्लाह (इराक),
42. अल-इतिहाद अल-इस्लामिया (सोमालिया),
43. मिस्र के इस्लामी जिहाद (मिस्र),
44. जुंद अल-शाम (जॉर्डन)
45. फजर नुसंतरा आंदोलन (ऑस्ट्रेलिया)
46. ​​इस्लामिक रिवाइवल का समाज
47. विरासत (टेरर फंडिंग, वर्ल्डवाइड कार्यालय)
48. तालिबान (अफगानिस्तान),
49. तालिबान (पाकिस्तान),
50. तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तान),
51. इस्लाम की सेना (सीरिया),
52. इस्लामिक मूवमेंट (इज़राइल)
53. अंसार अल शरिया (ट्यूनीशिया),
54. (जेरुसलम) के दूतों में मुजाहिदीन शूरा परिषद,
55. लीबिया इस्लामिक फाइटिंग ग्रुप (लीबिया),
(पश्चिम अफ्रीका) में एकता और जिहाद के लिए आंदोलन,
56. फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (फिलिस्तीन)
57. तेविद-सेलम (अल-कुद्स आर्मी)
58. मोरक्को इस्लामिक कॉम्बैटेंट ग्रुप (मोरक्को),
59. काकेशस अमीरात (रूस),
60. दुख्तारन-ए-मिलत नारीवादी इस्लामवादी (भारत),
61. इंडियन मुजाहिदीन (भारत),
62. जमात-उल-मुजाहिदीन (भारत)
63. अंसार अल-इस्लाम (भारत)
64. छात्र इस्लामिक आंदोलन (भारत),
65. हरकत मुजाहिदीन (भारत),
66. हिजबुल मुजाहिदीन (भारत)
67. लश्कर ए इस्लाम (भारत)
68. जुंद अल-ख़िलाफा (अल्जीरिया),
69. तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी,
70. मिस्र के इस्लामिक जिहाद (मिस्र),
71. ग्रेट ईस्टर्न इस्लामिक रेडर्स फ्रंट (तुर्की),
72. हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी (पाकिस्तान),
73. तहरीक-ए-नफ़ाज़-ए-शरीयत-ए-मोहम्मदी (पाकिस्तान),
74. लश्कर ए तैय्यबा (पाकिस्तान)
75. लश्कर ए झांगवी (पाकिस्तान) अहले सुन्नत वाल जमात (पाकिस्तान),
76. जमात उल-अहरार (पाकिस्तान),
77. हरकत-उल-मुजाहिदीन (पाकिस्तान),
78. जमात उल-फुरकान (पाकिस्तान),
79. हरकत-उल-मुजाहिदीन (सीरिया),
80. अंसार अल-दीन फ्रंट (सीरिया),
81. जबात फतेह अल-शाम (सीरिया),
82. जमाअह अनरहुत दौला (सीरिया),
83. नूर अल-दीन अल-ज़ेंकी आंदोलन (सीरिया),
84. लिवा अल-हक (सीरिया),
85. अल-तौहीद ब्रिगेड (सीरिया),
86. जुंद अल-अक्सा (सीरिया),
87. अल-तौहीद ब्रिगेड (सीरिया),
88. यरमौक शहीद ब्रिगेड (सीरिया),
89. खालिद इब्न अल-वलीद सेना (सीरिया),
90. हिज्ब-ए इस्लामी गुलबदीन (अफगानिस्तान),
91. जमात-उल-अहरार (अफगानिस्तान)
92. हिज्ब उत-तहरीर (विश्वव्यापी खलीफा),
93. हिजबुल मुजाहिदीन (कश्मीर),
94. अंसार अल्लाह (यमन),
95. राहत और विकास के लिए पवित्र भूमि फाउंडेशन (यूएसए),
96. जमात मुजाहिदीन (भारत),
97. जमाअह अनरहुत तौहीद (इंडोनेशिया),
98. हिज़बट तहरीर (इंडोनेशिया),
99. फजर नुसंतरा आंदोलन (इंडोनेशिया),
100. जेमाह इस्लामिया (इंडोनेशिया),
101. जेमाह इस्लामिया (फिलीपींस),
102. जेमाह इस्लामिया (सिंगापुर),
103. जेमाह इस्लामिया (थाईलैंड),
104. जेमाह इस्लामिया (मलेशिया),
105. अंसार डाइन (अफ्रीका),
106. अस्बत अल-अंसार (फिलिस्तीन),
107. हिज्ब उत-तहरीर (समूह को जोड़ने वाला)
108. इस्लामी खलीफा दुनिया भर में एक दुनिया इस्लामी खलीफा)
109. नक्शबंदी आदेश (इराक) के पुरुषों की सेना
110. अल नुसरा फ्रंट (सीरिया),
111. अल-बद्र (पाकिस्तान),
112. इस्लाम 4 यूके (यूके),
113. अल घुरबा (यूके),
114. कॉल टू सबमिशन (यूके),
115. इस्लामी पथ (यूके),
116. लंदन स्कूल ऑफ शरिया (यूके),
117. क्रुसेड्स (यूके) के खिलाफ मुस्लिम,
118. Need4Khilafah (यूके),
119. शरिया प्रोजेक्ट (यूके),
120. द इस्लामिक दाव एसोसिएशन (यूके),
121. उद्धारकर्ता संप्रदाय (यूके),
123. जमात उल-फुरकान (यूके),
124. मिनाबर अंसार दीन (यूके),
125. अल-मुहाजिरौन (यूके) (ली रिग्बी, लंदन 2017 के सदस्य),
126. इस्लामिक काउंसिल ऑफ़ ब्रिटेन (यूके) (ब्रिटेन की आधिकारिक मुस्लिम काउंसिल के साथ भ्रमित नहीं होना),
127. अहलुस सुन्नत वाल जामा (यूके),
128. एल-गामा (मिस्र),
129. अल-इस्लामिया (मिस्र),
130. (अल्जीरिया) के सशस्त्र इस्लामी लोग,
131. कॉल एंड कॉम्बैट (अल्जीरिया) के लिए सलाफिस्ट ग्रुप,
132. अंसारु (अल्जीरिया),
133. अंसार-अल-शरिया (लीबिया),
134. अल इत्तिहाद अल इस्लामिया (सोमालिया),
135. अंसार अल-शरिया (ट्यूनीशिया),
136. अल-शबाब (अफ्रीका),
137. अल-अक्सा फाउंडेशन (जर्मनी)
138. अल-अक्सा शहीद ब्रिगेड (फिलिस्तीन),
139. अबू सय्यफ़ (फिलीपींस),
140. अदन-अबान इस्लामिक सेना (यमन),
141. अजनाद मिसर (मिस्र),
142. अबू निदाल संगठन (फिलिस्तीन),
143. जमाअ अंसारुत तौहीद (इंडोनेशिया)

Wednesday, October 10, 2018

यौन अपराध (Sexual offenses)

यौन अपराध इस्लाम की देन~बलात्कार का आरंभ~मुझे पता है 90 % बिना पढ़े ही निकल लेंगेआखिर भारत जैसे देवियों को पूजने वाले देश में बलात्कार की गन्दी मानसिकता कहाँ से आयी ~~आखिर क्या बात है कि जब प्राचीन भारत के रामायण, महाभारत आदि लगभग सभी हिन्दू-ग्रंथ के उल्लेखों में अनेकों लड़ाईयाँ लड़ी और जीती गयीं, परन्तु विजेता सेना द्वारा किसी भी स्त्री का बलात्कार होने का जिक्र नहीं है।तब आखिर ऐसा क्या हो गया ?? कि आज के आधुनिक भारत में बलात्कार रोज की सामान्य बात बन कर रह गयी है ??~श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की पर न ही उन्होंने और न उनकी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया ।~महाभारत में पांडवों की जीत हुयी लाखों की संख्या में योद्धा मारे गए। पर किसी भी पांडव सैनिक ने किसी भी कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक न लगाया ।अब आते हैं ईसापूर्व इतिहास में~220-175 ईसापूर्व में यूनान के शासक "डेमेट्रियस प्रथम" ने भारत पर आक्रमण किया। 183 ईसापूर्व के लगभगउसने पंजाब को जीतकर साकल को अपनी राजधानी बनाया और पंजाब सहित सिन्ध पर भी राज किया। लेकिन उसके पूरे समयकाल में बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।~इसके बाद "युक्रेटीदस" भी भारत की ओर बढ़ा और कुछ भागों को जीतकर उसने "तक्षशिला" को अपनी राजधानी बनाया। बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।~"डेमेट्रियस" के वंश के मीनेंडर (ईपू 160-120) ने नौवें बौद्ध शासक "वृहद्रथ" को पराजित कर सिन्धु के पार पंजाब और स्वात घाटी से लेकर मथुरा तक राज किया परन्तु उसके शासनकाल में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।~"सिकंदर" ने भारत पर लगभग 326-327 ई .पू आक्रमण किया जिसमें हजारों सैनिक मारे गए । इसमें युद्ध जीतने के बाद भी राजा "पुरु" की बहादुरी से प्रभावित होकर सिकंदर ने जीता हुआ राज्य पुरु को वापस दे दिया और"बेबिलोन" वापस चला गया ।विजेता होने के बाद भी "यूनानियों" (यवनों) की सेनाओं ने किसी भी भारतीय महिला के साथ बलात्कार नहीं किया और न ही "धर्म परिवर्तन" करवाया ।~इसके बाद "शकों" ने भारत पर आक्रमण किया (जिन्होंने ई.78 से शक संवत शुरू किया था)। "सिन्ध" नदी के तट पर स्थित "मीननगर" को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर गुजरात क्षेत्र के सौराष्ट्र , अवंतिका, उज्जयिनी,गंधार,सिन्ध,मथुरा समेत महाराष्ट्र के बहुत बड़े भू भाग पर 130 ईस्वी से 188 ईस्वी तक शासन किया। परन्तु इनके राज्य में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं।~इसके बाद तिब्बत के "युइशि" (यूची) कबीले की लड़ाकू प्रजाति "कुषाणों" ने "काबुल" और "कंधार" पर अपना अधिकार कायम कर लिया। जिसमें "कनिष्क प्रथम" (127-140ई.) नाम का सबसे शक्तिशाली सम्राट हुआ।जिसका राज्य "कश्मीर से उत्तरी सिन्ध" तथा "पेशावर से सारनाथ" के आगे तक फैला था। कुषाणों ने भी भारत पर लम्बे समय तक विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। परन्तु इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि इन्होंने भारतीय स्त्रियों का बलात्कार किया हो ।~इसके बाद "अफगानिस्तान" से होते हुए भारत तक आये"हूणों" ने 520 AD के समयकाल में भारत पर अधिसंख्य बड़े आक्रमण किए और यहाँ पर राज भी किया। ये क्रूर तो थे परन्तु बलात्कारी होने का कलंक इन पर भी नहीं लगा।~इन सबके अलावा भारतीय इतिहास के हजारों साल के इतिहास में और भी कई आक्रमणकारी आये जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई जैसे "नेपालवंशी" "शक्य" आदि। पर बलात्कार शब्द भारत में तब तक शायद ही किसी को पता था।अब आते हैं मध्यकालीन भारत में~जहाँ से शुरू होता है इस्लामी आक्रमण~और यहीं से शुरू होता है भारत में बलात्कार का प्रचलन।~सबसे पहले 711 ईस्वी में "मुहम्मद बिन कासिम" ने सिंध पर हमला करके राजा "दाहिर" को हराने के बाद उसकी दोनों "बेटियों" को "यौनदासियों" के रूप में "खलीफा" को तोहफा भेज दिया।तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें "हारे हुए राजा की बेटियों" और "साधारण भारतीय स्त्रियों" का "जीती हुयीइस्लामी सेना" द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।~फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने "इस्लाम को फ़ैलाने" के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था।"सोमनाथ के मंदिर" को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर औरतों" का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ" लगाकर"जानवरों" की तरह "बेच" दिया ।~फिर "गौरी" ने 1192 में "पृथ्वीराज चौहान" को हराने के बाद भारत में "इस्लाम का प्रकाश" फैलाने के लिए"हजारों काफिरों" को मौत के घाट उतर दिया और उसकी "फौज" ने "अनगिनत हिन्दू स्त्रियों" के साथ बलात्कार कर उनका "धर्म-परिवर्तन"करवाया।~ये विदेशी मुस्लिम अपने साथ औरतों को लेकर नहीं आए थे।~मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह, अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर,~अपने हरम में "8000 रखैलें रखने वाला शाहजहाँ"।~ इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए "मीना बाजार" लगवाने वाला "जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर"।~मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है। जिनकी फौजोंने हारे हुए राज्य की लाखों "काफिर महिलाओं" "(माल-ए-गनीमत)"का बेरहमी से बलात्कार किया और "जेहाद के इनाम" के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह "सिपहसालारों" मेंबांटा तो कभी बाजारों में "जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी" गई।~ये असहाय और बेबस महिलाएं "हरमों" से लेकर"वेश्यालयों" तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच पायीं।~एकबार फिर से बता दूँ कि मुस्लिम "आक्रमणकारी" अपने साथ "औरतों" को लेकर नहीं आए थे।~वास्तव में मध्यकालीन भारत में मुगलों द्वारा"पराजित काफिर स्त्रियों का बलात्कार" करना एक आम बात थी क्योंकि वो इसे "अपनी जीत" या "जिहाद का इनाम" (माल-ए-गनीमत) मानते थे।~केवल यही नहीं इन सुल्तानों द्वारा किये अत्याचारों और असंख्य बलात्कारों के बारे में आज के किसी इतिहासकार ने नहीं लिखा।~बल्कि खुद इन्हीं सुल्तानों के साथ रहने वाले लेखकों ने बड़े ही शान से अपनी कलम चलायीं और बड़े घमण्ड से अपने मालिकों द्वारा काफिरों को सबक सिखानेका विस्तृत वर्णन किया।~गूगल के कुछ लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दुओं और हिन्दू महिलाओं पर हुए "दिल दहला" देने वाले अत्याचारों के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। वो भी पूरे सबूतों के साथ।~इनके सैकड़ों वर्षों के खूनी शासनकाल में भारत की हिन्दू जनता अपनी महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भागती और बसती रहीं।~इन मुस्लिम बलात्कारियों से सम्मान-रक्षा के लिए हजारों की संख्या में हिन्दू महिलाओं ने स्वयं को जौहर की ज्वाला में जलाकर भस्म कर लिया।~ठीक इसी काल में कभी स्वच्छंद विचरण करने वाली भारतवर्ष की हिन्दू महिलाओं को भी मुस्लिम सैनिकों की दृष्टि से बचाने के लिए पर्दा-प्रथा की शुरूआत हुई।~महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार का इतना घिनौना स्वरूप तो 17वीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर 1947 तक अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भी नहीं दिखीं। अंग्रेजों ने भारत को बहुत लूटा परन्तु बलात्कारियों में वे नहीं गिने जाते।~1946 में मुहम्मद अली जिन्ना के डायरेक्टर एक्शन प्लान, 1947 विभाजन के दंगों से लेकर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम तक तो लाखों काफिर महिलाओं का बलात्कार हुआ या फिर उनका अपहरण हो गया। फिर वो कभी नहीं मिलीं।~इस दौरान स्थिती ऐसी हो गयी थी कि "पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम बहुल इलाकों" से "बलात्कार" किये बिना एक भी "काफिर स्त्री" वहां से वापस नहीं आ सकती थी।~जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आ भी गयीं वो अपनीजांच करवाने से डरती थी।~जब डॉक्टर पूछते क्यों तब ज्यादातर महिलाओं का एक ही जवाब होता था कि "हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं ये हमें भी पता नहीं"।~विभाजन के समय पाकिस्तान के कई स्थानों में सड़कों पर काफिर स्त्रियों की "नग्न यात्राएं (धिंड) "निकालीगयीं, "बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं"~और 10 लाख से ज्यादा की संख्या में उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।~20 लाख से ज्यादा महिलाओं को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया। (देखें फिल्म "पिंजर" और पढ़ेंपूरा सच्चा इतिहास गूगल पर)।~इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे।~वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार करनेके बाद उनके "स्तनों को काटकर" तड़पा-तड़पा कर मारना आम बात थी।अंत में कश्मीर की बात~~19 जनवरी 1990~~सारे कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया जिसमें लिखा था~ "या तो मुस्लिम बन जाओ या मरने के लिए तैयार हो जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ लेकिन अपनी औरतों को यहीं छोड़कर "।~लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं।~वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" लगातार तीन दिन तक यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा,"निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर"कहना है।~और 'असि गच्ची पाकिस्तान, बताओ "रोअस ते बतानेव सान" जिसका मतलब था कि हमें यहां अपना पाकिस्तान बनाना है, कश्मीरी पंडितों के बिना मगर कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ।~सदियों का भाईचारा कुछ ही समय में समाप्त हो गया जहाँ पंडितों से ही तालीम हासिल किए लोग उनकी ही महिलाओं की अस्मत लूटने को तैयार हो गए थे।~सारे कश्मीर की मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमें मुस्लिमों को कहा गया की वो हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये।~उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके "नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया"।~कुछ महिलाओं को बलात्कार कर जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से मार दिया गया।~कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेजअस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी।~बच्चों को उनकी माँओं के सामने स्टील के तार से गला घोंटकर मार दिया गया।~कश्मीरी काफिर महिलाएँ पहाड़ों की गहरी घाटियों और भागने का रास्ता न मिलने पर ऊंचे मकानों की छतों से कूद कूद कर जान देने लगी।~लेखक राहुल पंडिता उस समय 14 वर्ष के थे। बाहर माहौलख़राब था। मस्जिदों से उनके ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। पीढ़ियों से उनके भाईचारे से रह रहे पड़ोसी ही कह रहेथे, 'मुसलमान बनकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो या वादी छोड़कर भागो'।~राहुल पंडिता के परिवार ने तीन महीने इस उम्मीद में काटे कि शायद माहौल सुधर जाए। राहुल आगे कहते हैं,"कुछ लड़के जिनके साथ हम बचपन से क्रिकेट खेला करते थेवही हमारे घर के बाहर पंडितों के ख़ाली घरों को आपस में बांटने की बातें कर रहे थे और हमारी लड़कियों के बारे में गंदी बातें कह रहे थे। ये बातें मेरे ज़हन में अब भी ताज़ा हैं।~1989 में कश्मीर में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी संगठन का नारा था- 'हम सब एक, तुम भागो या मरो'।~घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। हालात और बदतर हो गए थे।~कुल मिलाकर हजारों की संख्या में काफिर महिलाओं का बलात्कार किया गया।~आज आप जिस तरह दाँत निकालकर धरती के जन्नत कश्मीर घूमकर मजे लेने जाते हैं और वहाँ के लोगों को रोजगार देने जाते हैं। उसी कश्मीर की हसीन वादियों में आज भीसैकड़ों कश्मीरी हिन्दू बेटियों की बेबस कराहें गूंजती हैं, जिन्हें केवल काफिर होने की सजा मिली।~घर, बाजार, हाट, मैदान से लेकर उन खूबसूरत वादियों में न जाने कितनी जुल्मों की दास्तानें दफन हैं जो आजतक अनकही हैं। घाटी के खाली, जले मकान यह चीख-चीख के बताते हैं कि रातों-रात दुनिया जल जाने का मतलब कोई हमसे पूछे। झेलम का बहता हुआ पानी उन रातों की वहशियतके गवाह हैं जिसने कभी न खत्म होने वाले दाग इंसानियतके दिल पर दिए।~लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पंडित रविन्द्र कोत्रू के चेहरे पर अविश्वास की सैकड़ों लकीरें पीड़ा की शक्ल में उभरती हुईं बयान करती हैं कि यदि आतंक के उन दिनों में घाटी की मुस्लिम आबादी ने उनका साथ दिया होता जब उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा था, उनके साथ कत्लेआम हो रहा था तो किसी भी आतंकवादी में ये हिम्मत नहीं होती कि वह किसी कश्मीरी पंडित को चोट पहुंचाने की सोच पाता लेकिन तब उन्होंने हमारा साथ देने के बजाय कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए थे या उनके ही लश्कर में शामिल हो गए थे।~अभी हाल में ही आपलोगों ने टीवी पर "अबू बकर अल बगदादी" के जेहादियों को काफिर "यजीदी महिलाओं" को रस्सियों से बाँधकर कौड़ियों के भाव बेचते देखा होगा।~पाकिस्तान में खुलेआम हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर सार्वजनिक रूप से मौलवियों की टीम द्वारा धर्मपरिवर्तन कर निकाह कराते देखा होगा।~बांग्लादेश से भारत भागकर आये हिन्दुओं के मुँह से महिलाओं के बलात्कार की हजारों मार्मिक घटनाएँ सुनी होंगी।~यहाँ तक कि म्यांमार में भी एक काफिर बौद्ध महिला केबलात्कार और हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा के भीषण दौरको देखा होगा।~केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में इस सोच नेमोरक्को से ले कर हिन्दुस्तान तक सभी देशों पर आक्रमण कर वहाँ के निवासियों को धर्मान्तरित किया, संपत्तियों को लूटा तथा इन देशों में पहले से फल फूल रही हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता का विनाश कर दिया।~परन्तु पूरी दुनियाँ में इसकी सबसे ज्यादा सजा महिलाओं को ही भुगतनी पड़ी...बलात्कार के रूप में ।~आज सैकड़ों साल की गुलामी के बाद समय बीतने के साथ धीरे-धीरे ये बलात्कार करने की मानसिक बीमारी भारत के पुरुषों में भी फैलने लगी।~जिस देश में कभी नारी जाति शासन करती थीं, सार्वजनिकरूप से शास्त्रार्थ करती थीं, स्वयंवर द्वारा स्वयं अपना वर चुनती थीं, जिन्हें भारत में देवियों के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता था आज उसी देश में छोटी-छोटी बच्चियों तक का बलात्कार होने लगा और आज इसमानसिक रोग का ये भयानक रूप देखने को मिल रहा है ।

सेंधा नमक : भारत से कैसे गायब कर दिया गया, शरीर के लिए Best Alkalizer है

सेंधा नमक : भारत से कैसे गायब कर दिया गया, शरीर के लिए Best Alkalizer है :-
आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको बताते हैं कि नमक मुख्य कितने प्रकार होते हैं। एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock salt) । सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है । जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। तों अंत आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले। काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकर्ति का बनाया है ईश्वर का बनाया हुआ है। और सदैव याद रखे इंसान जरूर शैतान हो सकता है लेकिन भगवान कभी शैतान नहीं होता।
भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है , उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है,
हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियो (अनपूर्णा,कैपटन कुक ) ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ ! अब समझिए खेल क्या था ?? खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ , आओडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आओडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई । और जो नमक किसी जमाने मे 2 से 3 रूपये किलो मे बिकता था । उसकी जगह आओडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है।
दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 साल पहले ban कर दिया अमेरिका मे नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस मे नहीं ,डेन्मार्क मे नहीं , डेन्मार्क की सरकार ने 1956 मे आओडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ?? उनकी सरकार ने कहा हमने मे आओडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया ! उनके वैज्ञानिको ने कहा कि आओडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया। और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश मे ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आओडीन युक्त नमक भारत मे बिक नहीं सकता । वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट मे मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।
आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे ।
सेंधा नमक के फ़ायदे:-
सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है । क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं ।
ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है । और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुंदरी नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??
सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वो की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis) का अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।
यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।
समुद्री नमक के भयंकर नुकसान :-
ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप मे ही बहुत खतरनाक है ! क्योंकि कंपनियाँ इसमे अतिरिक्त आओडीन डाल रही है। अब आओडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक मे होता है । दूसरा होता है “industrial iodine” ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरिया हम लोगो को आ रही है । ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों मे निर्मित है।
आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है ।
ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है ! और बीमारिया जरूर साथ मे मिल जाती है !
रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने मे परेशानी होती है। जोड़ो का दर्द और गढिया, प्रोस्टेट आदि होती है। आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है। 1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओ के पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।
निवेदन :पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है। भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है। आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है। जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था। यहां तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था। स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था। समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का प्रयोग होना चाहिए।
आप इस अतिरिक्त आओडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आओडीन हर नमक मे होता है सेंधा नमक मे भी आओडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक मे प्राकृतिक के द्वारा भगवान द्वारा बनाया आओडीन होता है इसके इलावा आओडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।

Thursday, June 25, 2015